नाम-शैलेन्द्र चेलक
शीर्षक -जिंदगी रेलगाड़ी है
मोबाइल-9098518976
पता-पेंडरवानी ,बालोद ,छ. ग.
जिंदगी रेलगाड़ी है
जिंदगी रेलगाड़ी है,
जिसमें सुख की ,दुख की सवारी है ,
संघर्षों की पटरी में चलती जिंदगी,
ढोते सुख को ,दुख को ,
खुद की कोई आस न सही ,
अपनो के लिए ढोते खुद को,
दुख जैसे कच्चा माल,
जिसे बदलना है सुख सी अयस्क में ,
यूँ जैसे बदलता बचपन ,
जिम्मेदार वयस्क में ,
ऐसे जीवन की बढ़ती सवारी,
सुख सी थोड़ी ठहराव ,
यूँ मानो स्टेशन आया,
जिम्मेदारियों का माल भरा ,
फिर पटरी पर ठोकर खाया ,
क्योंकि सुख के बाद दुख की बारी है , जिंदगी .....
कभी इंजन सा घर का मुखिया ,
परिवार जैसे हो रेल का डिब्बा ,
जिसके बिना अस्तित्व हीन इंजन ,
बढ़ नही सकता ,चल नही सकता ,
जिसके सिर सबकी जिम्मेदारी है , जिंदगी .....
यूँ तो हर व्यक्ति कलाकार भी है,
जिसे निभाना है अपना किरदार भी ,
जब- तक जीवन है ,
भिन्न -भिन्न रूपों में निभाना है ,
ऊँच - नीच हो भले रास्ते ,
आगे ही बढ़ते जाना है ,
अंततः जाना होगा दूर , बहुत दूर ,
कुछ एक खुश , कई मजबूर ,
क्योंकि यहां(जीवन ) के बाद
वहां (मृत्यु ) की बारी है ,
जिंदगी रेलगाड़ी है ......
- शैलेन्द्र चेलक -
बहुत बहुत बधाई हो सर जी। 👌👌
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