Monday, September 30, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री माधवी गणवीर की प्रकाशित रचना -प्याज



नाम- माधवी गणवीर
शीर्षक- प्याज
जिला- राजनादगांव
राज्य- छत्तीसगढ़
सम्पर्क- 7999
कविताा

फिर से सब्जियों की रानी होने लगी है प्याज,
अपना रुतबा फिर से दिखाने लगी है प्याज।
सब्जी मंडी में सब्जियों से जरा हट के,
सरे आम अंगूठा दिखाने लगी है प्याज।
घर की क्यारी में धनियां मेथी की जगह,
अम्मा सबकी देखा देखी उगाने लगी है प्याज।
गरीबो की थाली का हिस्सा भी अब किस्सा हुआ,
आज अमीरो के डायनिग टेबल पर फलों संग लगी है प्याज।
कभी पास-पड़ोस में प्याज के लेंन देंन का न था हिसाब,
आज पड़ोसी -पड़ोसी में आग लगा रही है प्याज।
बीवी कहती जाने दो प्याज पर क्यो उमड़ रहा प्यार,
पहले हाथ मे आते ही आँशु अब हाथ तक आने को रुलाने लगी प्याज।
भरे मन से हुक्म ये भी जारी कर दिया जाय,
पहले सुखी रोटी संग निगलते थे प्याज,अब हमको ही निगलने लगी है प्याज।
माधवी गणवीर

7 comments:

  1. प्याज पर सुंदर पंक्तियां

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  2. प्याज की महिमा वाकई में सबपे भारी

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  3. Vaskvik jivan ki aam ghrelu smsya ki behtrin kvita

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  4. Bahut sahi
    Pakistani log Tamatar ke liye aise hi nagme likhtey hongey

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  5. बहुत सुन्दर रचना

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  6. वाह! क्या राज है प्याज-
    अति सुन्दर

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