नाम- माधवी गणवीर
शीर्षक- प्याज
जिला- राजनादगांव
राज्य- छत्तीसगढ़
सम्पर्क- 7999
कविताा
शीर्षक- प्याज
जिला- राजनादगांव
राज्य- छत्तीसगढ़
सम्पर्क- 7999
कविताा
फिर से सब्जियों की रानी होने लगी है प्याज,
अपना रुतबा फिर से दिखाने लगी है प्याज।
अपना रुतबा फिर से दिखाने लगी है प्याज।
सब्जी मंडी में सब्जियों से जरा हट के,
सरे आम अंगूठा दिखाने लगी है प्याज।
सरे आम अंगूठा दिखाने लगी है प्याज।
घर की क्यारी में धनियां मेथी की जगह,
अम्मा सबकी देखा देखी उगाने लगी है प्याज।
अम्मा सबकी देखा देखी उगाने लगी है प्याज।
गरीबो की थाली का हिस्सा भी अब किस्सा हुआ,
आज अमीरो के डायनिग टेबल पर फलों संग लगी है प्याज।
आज अमीरो के डायनिग टेबल पर फलों संग लगी है प्याज।
कभी पास-पड़ोस में प्याज के लेंन देंन का न था हिसाब,
आज पड़ोसी -पड़ोसी में आग लगा रही है प्याज।
आज पड़ोसी -पड़ोसी में आग लगा रही है प्याज।
बीवी कहती जाने दो प्याज पर क्यो उमड़ रहा प्यार,
पहले हाथ मे आते ही आँशु अब हाथ तक आने को रुलाने लगी प्याज।
पहले हाथ मे आते ही आँशु अब हाथ तक आने को रुलाने लगी प्याज।
भरे मन से हुक्म ये भी जारी कर दिया जाय,
पहले सुखी रोटी संग निगलते थे प्याज,अब हमको ही निगलने लगी है प्याज।
पहले सुखी रोटी संग निगलते थे प्याज,अब हमको ही निगलने लगी है प्याज।
माधवी गणवीर

प्याज पर सुंदर पंक्तियां
ReplyDeleteप्याज की महिमा वाकई में सबपे भारी
ReplyDeleteVaskvik jivan ki aam ghrelu smsya ki behtrin kvita
ReplyDeleteBahut sahi
ReplyDeletePakistani log Tamatar ke liye aise hi nagme likhtey hongey
Nice kavita प्याज़ के ऊपर
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना
ReplyDeleteवाह! क्या राज है प्याज-
ReplyDeleteअति सुन्दर