1-कवि का नाम-कालिका प्रसाद सेमवाल
2-शार्षक-हे प्रिये
3-राज्य-उत्तराखण्ड रूद्रप्रयाग
4-सम्पर्क -8171208350
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हे प्रिये
स्नेह की मधुर बयार में सदा पला प्रिये।
वियोग दीप में लिपट पतंग सा जला प्रिये।।
चूमती धरा उषा किरण उठी निहारती,
झूमती निशा गई उतारती सी आरती,
डोलती है मंद वायु बोलती पपीहरी,
खोखली सुगंधि कोष मालती मनोहरी
किन्तु दूर दूर मैं उदास भाव से भरा।
वियोग धूप में सदा तुषार सा गला प्रिये।।
पास तुम रहो, भले ही दूर आसमान हो,
प्रसन्न तुम रहो, भले ही रूठना ज़हान हो,
एक सूत में बंधे रहे विलग न प्रयाण हो,
चला रहे मनुष्य जब कुचक्र के ही वाणहो।
रोम रोम में भरी मधुर अनन्त कामना।
किन्तु दूर दूर कौन जी सका भला प्रिये।।
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कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार रूद्रप्रयाग
उत्तराखंड 246171
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