Monday, September 23, 2019

छत्तीसगढ,बलौदाबाजार से परमानंद निषाद"सचिन" की रचना- नारी का अपमान

कवि का नाम- परमानंद निषाद"सचिन"
शीर्षक  - नारी का अपमान
राज्य - छत्तीसगढ,बलौदाबाजार
संपर्क- 7974389033

       नारी का अपमान
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अपमान नहीं करना नारियों का,
उनके बल पर ही संसार चलता है,

नारी से जग चलता है,
नारी बिन अधूरा जग,

नारियों अपमान को ना सहते जाओ,
दुष्टों को दण्ड देती जाओ,

अपने जीवन में अंधकार को मिटाती जाओ और,
अपने जीवन में रोशनी की खुशियां बनाते जाओ,

नारी का अपमान करना किसी के स्वभाव में हो सकता है,
नारी का सम्मान करना हमारे स्वभाव में होना चाहिए,

कर खुलकर विरोध अत्याचारियों का,
भ्रष्टाचारियों को मिटाती जा,
इस संसार को सुखों से भरती जा,

दिलो में बस जाये तो मोहब्बत है,
कभी दुर्गा तो, कभी काली है,

लुटेरा है अगर आजाद तो सबका अपमान है,
लुटी है नारी तो लुटा सबका सम्मान है,

जो स्त्री का अपमान करता है,
वो मां का अपमान करता है,

जो मां का अपमान करता है,
वो भगवान का अपमान करता है,

जो भगवान का अपमान करता है,
उसका अंत निश्चित है ।

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