कवि.. .. बाबू लाल शर्मा, बौहरा
शीर्षक.. मन हो रहा हताश
राज्य.. .. राजस्थान
मो.नं. ... 9782924479
✨✨✨✨✨✨✨✨✨✨
~~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा
. ✨ *मन हो रहा हताश* ✨
. (दोहा छंद)
. ✨✨१✨✨
अपनी भाषा के बने, हम ही दुश्मन मीत।
सोच फिरंगी मन रखें, बस बड़ बोले गीत।।
. ✨✨२✨✨
निज की सोच सुधार कर,बदलें फिर संसार।
अंग्रेजी की कार तज, शिशु को दें संस्कार।।
. ✨✨३✨✨
उड़ना छोड़ें पंख बिन, चलें धरातल शान।
हिन्दी हिंदुस्तान की, तब ही हो पहचान।।
. ✨✨४✨✨
नशा उतरता शीघ्र ही, ज्ञान मरघटी तात।
गया दिवस हिन्दी मना, वही ढाँक के पात।।
. ✨✨५✨✨
एक दिवस त्यौहार सा,जय जय हिन्दी फाग।
बारह महीने फिर वही, अपनी ढोलक राग।।
. ✨✨६✨✨
हम ही हैं दोषी बड़े, खुद अपनी सरकार।
अपने स्वारथ कर रहे,हिन्दी का प्रतिकार।।
. ✨✨७✨✨
कहने को माता महा, वृद्धाश्रम की शान।
एक दिवस ही कर रहे, हिन्दी का सम्मान।।
. ✨✨८✨✨
हिन्दी बिन्दी सम रखोे, तो हिन्दी हित पुण्य।
ऊँचे उड़ कर स्वार्थ में, मत कर हिन्दी शुन्य।।
. ✨✨९✨✨
मातृभाष अवमान से, मन हो रहा हताश।
हिन्दी नेह प्रकाश से,सत साहित्यिक आस।।
. ✨✨१०✨✨
दस दोहों में लिख रहा, हिन्दी की मन प्यास।
कवियों से ही बच रही,हिन्दी हित की आस।।
. ✨✨🌞✨✨
✍©
बाबू लाल शर्मा,बौहरा
सिकंदरा, दौसा,राजस्थान
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Monday, September 16, 2019
राजस्थान से कवि- बाबू लाल शर्मा, बौहरा की कृति- मन हो रहा हताश
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