कवयित्री का नाम-मीरा आर्ची
चौहान
शीर्षक- कहती है इन्द्रावती
राज्य-छत्तीसगढ़
संपर्क-
चौहान
शीर्षक- कहती है इन्द्रावती
राज्य-छत्तीसगढ़
संपर्क-
बस्तर की गोद में
उछल-उछलकर
रात-दिन
हंस हंस कर
खूब खेला
करती है
इन्द्रावती।
थोड़ा -सा
नांच थिरक
इतरा कर
बलखाकर
कभी-कभी
इठलाकर
चलती है।
नटखट
मचलती है।
दूर-दूर फैली
हरी-भरी
मनभावन
वादियों के बीच
बहती है
इन्द्रावती।
कभी किसी
कन्दरा में
कभी किसी
प्रस्तर में
पलभर नन्हें
मृगछौने-सा
कहीं लुक
छिपकर
और फिर
भाग-भागकर
फिर हौले-हौले
लंबी छलांगें
भरती है
इन्द्रावती।
कितनी ही
चट्टानें
तोड़-तोड
बहती है
पार कर
बाधाएं
बढ़ती ही
रहती है,
नहीं घबराती है
कभी भी
मुसीबत में
नहीं किसी
संकट से
डरती है
इन्द्रावती।
-मीरा आर्ची चौहान
बरदेभाटा, कांकेर
उछल-उछलकर
रात-दिन
हंस हंस कर
खूब खेला
करती है
इन्द्रावती।
थोड़ा -सा
नांच थिरक
इतरा कर
बलखाकर
कभी-कभी
इठलाकर
चलती है।
नटखट
मचलती है।
दूर-दूर फैली
हरी-भरी
मनभावन
वादियों के बीच
बहती है
इन्द्रावती।
कभी किसी
कन्दरा में
कभी किसी
प्रस्तर में
पलभर नन्हें
मृगछौने-सा
कहीं लुक
छिपकर
और फिर
भाग-भागकर
फिर हौले-हौले
लंबी छलांगें
भरती है
इन्द्रावती।
कितनी ही
चट्टानें
तोड़-तोड
बहती है
पार कर
बाधाएं
बढ़ती ही
रहती है,
नहीं घबराती है
कभी भी
मुसीबत में
नहीं किसी
संकट से
डरती है
इन्द्रावती।
-मीरा आर्ची चौहान
बरदेभाटा, कांकेर
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