कवि - गजेंद्र द्विवेदी "गिरीश"
राज्य - छत्तीसगढ़ (निवास - भिलाई 3)
संपर्क संख्या - 7000858588
शीर्षक - जयहिंद
(शक्ति छन्द पर एक प्रयास)
वतन पर लुटाने वो अनथक चले,
अमर नाम उनका जो मन से ढले|
अकड़ते किसी पल कहीं वो जले,
मगर ना रुके वो भले ही गले|१|
अगर राह आसान होती जरा,
नजर में सदा वो उतरता खरा|
कड़ा हो डगर तो फिकर ना करे,
रहे सामने वो कभी ना डरे|२|
सदा प्रेम का ही सरोवर बहे| ,
थे हरदम मगन दूसरी ना कहे।
सरल राह चलते कहीं ना धरे,
वो आदर से गागर में सागर भरे|३|
(c) गजेन्द्र द्विवेदी “गिरीश”
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