कवियत्री का नाम-अनिता सुभाष देशमुख
शीर्षक-नारी
राज्य-छत्तीसगढ़
सम्पर्क नं.-7697492538
कविता-
*नारी*
नारी बिन नर का अस्तित्व अधूरा है,
नारी से ही मानव जीवन होता पूरा है
माँ भी है नारी,बहन भी है नारी
हर दर्द को करती सहन भी है नारी।
बेटी बनकर जो गुलजार करती है अपने घर को,
बन बहु तरसती है माँ बाप सा प्रेम पाने उम्र भर को।
दुख में भी अपनी आँसू पीती है नारी,
हर जख्म को अंदर से सीती है नारी।
कभी बन राधा पकृष्ण से बिछोह हुआ,
कभी बन सीता अग्नि में उतरती है।
जुड़ें सारे रिश्तों के,
प्रेममयी व्यवहार से ही नारी संवरती है।
धन दौलत की चाह नही रखती कभी,
बस एक सम्मान को तरसती है नारी,
होता अपमान चाहे लाखो बार,
न कभी फिर भी बरसती है नारी।
प्रेम मिले जहाँ उस आंगन को,
स्वर्ग बना देती है नारी,
कांटो के चादर को भी मखमली स्वर्ण बना देती है नारी।
सारी ख़्वाहिशों को अपनी,
दमन कर जाती है नारी,
खुद तपकर आग में पूरी,
हर वचन कर जाती है नारी।
*********************
....✍️ अनिता सुभाष देशमुख
No comments:
Post a Comment