Sunday, July 7, 2019

झड़ी by अनिता सुभाष देशमुख

मउसम लागत हे बड़ सुघ्घर,
      दिखत हे  रुख राई हरियर,
बेचावत हे सरई बोड़ा अउ बाँस करी।
आगे हावे संगवारी देखव झड़ी।

कुरता सबो कच्चा हावे,
    दिन रतिहा म नई सुखावत हे,
ये बदरी के जुर ह,
   हाँथ गोड़ ल दुखावत हे।
घर म चुचवावत हे,पानी ह सरी,
आगे हावे संगवारी देखव झड़ी।

रद्दा म जम्मो डाहर,
   मेचका ह कूदत हे,
बियारा म रखे पैरा म,
   फुटू घलो फूटत हे।
अमली म चूरे हावे,चना दार संग जरी,
आगे हावे संगवारी देखव झड़ी।

✍अनिता सुभाष देशमुख©®
5 जुलाई 2019

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...