मउसम लागत हे बड़ सुघ्घर,
दिखत हे रुख राई हरियर,
बेचावत हे सरई बोड़ा अउ बाँस करी।
आगे हावे संगवारी देखव झड़ी।
कुरता सबो कच्चा हावे,
दिन रतिहा म नई सुखावत हे,
ये बदरी के जुर ह,
हाँथ गोड़ ल दुखावत हे।
घर म चुचवावत हे,पानी ह सरी,
आगे हावे संगवारी देखव झड़ी।
रद्दा म जम्मो डाहर,
मेचका ह कूदत हे,
बियारा म रखे पैरा म,
फुटू घलो फूटत हे।
अमली म चूरे हावे,चना दार संग जरी,
आगे हावे संगवारी देखव झड़ी।
✍अनिता सुभाष देशमुख©®
5 जुलाई 2019
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