विधा- दोहा
विषय- पुरवाई
पुरवाई जा कह ज़रा, साजन को संदेश
तुम बिन अब तो साजना, सावन लगे कलेश।।
सावन की पुरवाइयाँ, जिया उठावत पीर ।
आ जाओ अब साजना, मन है होत अधीर ।।
पुरवाई बैरन भई, पिया नहीं है पास ।
कर सोलह सिंगार अब,पिया मिलन की आस ।।
तुम आते जो साजना, ले हाथो में हाथ ।
पवन मंद शीतल बहे,हम तुम होते साथ ।।
केवरा यदु "मीरा "
राजिम
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