Sunday, July 7, 2019

पुरवाई by केवरा यदु "मीरा "

विधा- दोहा
विषय- पुरवाई

पुरवाई जा कह ज़रा,  साजन को संदेश
तुम बिन अब तो साजना, सावन लगे कलेश।।

सावन की पुरवाइयाँ, जिया उठावत पीर ।
आ जाओ अब साजना, मन है होत अधीर ।।

पुरवाई बैरन भई, पिया नहीं है पास ।
कर सोलह सिंगार अब,पिया मिलन की आस ।।

तुम आते जो साजना, ले हाथो में हाथ ।
पवन मंद शीतल बहे,हम तुम होते  साथ ।।

केवरा यदु "मीरा "
राजिम

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