Sunday, July 7, 2019

बाढ़" विषय पर दोहे :- विरेन्द्र कुमार साहू

तीव्र  वेग  से  बढ़ रही , अपराधों  की बाढ़।
अपराधी  इतरा  रहे , आया  ज्यों  आषाढ़।।

कलकल  नदियाँ दौड़ती , बना बहाना बाढ़।
सागर के  प्रति  प्रेम तब , होता और  प्रगाढ़।।

बाढ़  बड़ा अभिशाप है , लेती लाखों  जान।
है यह देश विकास में , बहुत बड़ा व्यवधान।।

बाँध बनाकर लो बचा , नदी  बाढ़ का नीर।
बची  रहेगी  फिर सदा , जीवों की  जागीर।।

नित्य अध्ययन जो करे , पाये ज्ञान  अपार।
वर्षा जल से मिल बढ़े,ज्यों नदियों की धार।।

छंदकार:-
          विरेन्द्र कुमार साहू
        ग्राम बोड़राबाँधा (पाण्डुका)
        वि.स. राजिम जि. गरियाबंद
        छ.ग.  9993690899

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