तीव्र वेग से बढ़ रही , अपराधों की बाढ़।
अपराधी इतरा रहे , आया ज्यों आषाढ़।।
कलकल नदियाँ दौड़ती , बना बहाना बाढ़।
सागर के प्रति प्रेम तब , होता और प्रगाढ़।।
बाढ़ बड़ा अभिशाप है , लेती लाखों जान।
है यह देश विकास में , बहुत बड़ा व्यवधान।।
बाँध बनाकर लो बचा , नदी बाढ़ का नीर।
बची रहेगी फिर सदा , जीवों की जागीर।।
नित्य अध्ययन जो करे , पाये ज्ञान अपार।
वर्षा जल से मिल बढ़े,ज्यों नदियों की धार।।
छंदकार:-
विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम बोड़राबाँधा (पाण्डुका)
वि.स. राजिम जि. गरियाबंद
छ.ग. 9993690899
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