हो हो हो.............!
हो हो हो........!
आज ना महुवा तरी
करमा नाचे ल महुवा तरी।
ए गिया.....................!
बडा़ सुघ्घर लागत हावे
महुवा के छांव।
कहां हावे गोयी
तोर मया के तोर गांव।
ए गिया............ .......!
बडा़ सुघ्घर लागत हावे
तोर पागा के कलगी।
रुप खुले तोर
झुलपहा चुंदी।
ए संगी.................!
मांग फागुन माते
आमा ह मऊरे परसा ह माते।
दाहकत होरी मा
मन डोले।
ए गिया................!
पानी ल डाहके
मंजुर खारे खार।
कोईली ह कुहके
आमा के डार।
ए संगी............. !
पुरुषोत्म चक्रधारी सूर्य
पांडुका गरियाबंद
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