Sunday, July 7, 2019

मेरे हमसफर by अनिता सुभाष देशमुख

💕माँग की सिंदूर की लाली,
आज ही के दिन मेरी मांग में,
तुमने थी सजाई।
कर कन्यादान मेरे पिता ने करूण हृदय से,
की थी मेरी विदाई।💕

💕सात वचनों के सात फेरों से,
बंधा है जो ये बंधन,
साजन के रूप में पाना चाहती हूं,
तुम्हे मैं हर जनम।💕

💕जिन हांथो में मैने आपके नाम की थी मेंहंदी रचाई,
उसी हांथों में चूड़ियां भी इस दिन आपने थी पहनाई।💕

💕लेकर अपने हाथों में मेरा हाथ,
पाणिग्रहण का रस्म निभाये थे,
लाल रंग की चूनरी से,
मेरी घूँघट आप ढकायें थे।💕

💕माथे में बिंदिया मैंने ,
आपके लिए थी लगाई,
पाँव की पायल की घुंघुरुओं से ,
आपके हृदय  को थी छनकाई,💕

💕गले मे पहनाई थी आपने
अपने प्रेम के मंगलसूत्र की हार,
पैरों में महावर की रंग ने,
रंग दी नए जीवन की सार।💕

💕जीवन सुखमय हुई है मेरी,
जुड़ने से तेरे संग,
प्रीत की डोरी की गांठ मजबूत हो इतनी,
न छिड़े कभी एकदूजे बीच कोई अनबन की जंग।💕

💕सुख दुख का हर पथ,
मिलकर हम पार करें,
प्रेम की निर्मल छाया से,💕
इस रिश्ते को मनुहार करें।

💕बाबुल के लाड  को मैंने ,
जिस दिन से छोड़ आयी  है,
हर कदम तुम साथ खड़े हो
,तुझमे दिखती मेरे पिता की परछाई है।💕

💕तुम  ही मेरे हो हमदम,
तुम ही मेरी  जिंदगी  हो,
करूं प्रभु से जो मनन,
तुम वो ही मेरी बंदगी हो।💕

....✍️अनिता सुभाष देशमुख
    12/03/2019

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