दिनाँक-5 मई 2019
दिन-रविवार
विषय-किसान की व्यथा
विधा- गजल।
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अनाज उगाने का सारा भार दिया है,
खुदा ने जिनके सर,
कड़ी धूप में रह जाता वो किसान तपकर,
चाहे झुलसे ,कई बार मौसम की मार में
न जाता फिर भी वो अपने घर।
पसीना का एक एक कतरा बहाता है,
मेहनत का सही फल न मिल पाता पर।
दो वक्त के रोटी को दिन भर
खेत मे काम करता
कराहता है दर्द से रोज रात भर।
चाहे हो तेज तपन,
चाहे बारिश की हो बौछार,
जुटा रहता है काम में हर पहर।
परिश्रम के मुताबिक न मिलता कभी,
तय करता रहता कर्म का मीलों सफर।
लाखो लोगो के पेट भरने की,
जिम्मेदारी बांधे रखता अपने सर।
क्या सुनाई उस किसान की व्यथा,
हँसकर पार करता जीवन का हर डगर।
एक दिन भी न चैन से सोता,
जीता है वो रोज मर मरकर।
✍️अनिता सुभाष देशमुख
चंदना राजिम।
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