दिनाँक-०१/०५/२०१९
दिन- बुधवार
आज के ए जुग म जम्मो झन
एक दूसर ले हिजगा करत हे,
स्कूल में आगे बढ़े बर,
जी जान लगा के पढ़त हे।
एके कोख ले जन्में लइका मन,
महतारी ल अपन करा नई राखे बर,
दिन रात झगड़ा करत हे,
जेन दाई अपन नींद गवाइस पाले बर उमन ल,
ओहर एमन के हिजगा म
आँसू ल अपन पी पीके मरत हे।
जब आइस बहू ह घर म,
सास अपन बात ल थोपत हे,
जइसे रहय ओ अपन बेरा में,
बहु म उही नियम ल खोपत हे।
जिहां जाबे उहां,
हिजगा म होवत मारामारी हे,
मोर हिस्सा में घर ल दे,
तोर हिस्सा में ओ बाड़ी हे।
मया नई दिखे कोनो के अंतस में,
अपन गलती ल दूसर म झोपत हे,
जेन हावय सिधवा तेहा काले चुप,
सब दरद ल झोकत हे।
रचनाकार-अनिता सुभाष देशमुख
चंदना(राजिम)
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