ये जगत के तै आधार,
तोर महिमा हावय अपार ।
हे जगन्नाथ स्वामी,
तेहा अंतर्यामी।
मोर उद्धार करो 2
भव ले पार करो।
💐
हे अनाथों के नाथ,
तोला कहिथे जगन्नाथ।
हम दीन दुखियों के संग,
तै रहिथस हरदम साथ।।
मोर उद्धार करो-2
भव ले पार करो।।
💐
छप्पन भोग स्वामी,
मैं कहाँ ले लाहूँ।
खिचड़ी के संग मूंग के,
तोला भोग मैं लगाहूँ।।
भाव ल स्वीकार करो-2
भव ले पार करो ।।
💐
मोर दाई करमा ह ,
तोला मनाईस हे।
श्रद्धा के फूल स्वामी,
तोर पाँव चढ़ाईस हे।
मोर उद्धार करो-2
भव ले पार करो।।
💐
बलराम, सुभद्रा संग,
पूरी म बिराजे हस।
तै करे बर रथयात्रा,
तन मन ल साजे हस।।
मोर उद्धार करो-2
भव ले पार करो।।
✒रचना✒
श्रवण कुमार साहू"प्रखर"
राजिम, गरियाबंद(छ. ग.)
Sunday, July 7, 2019
हे जगन्नाथ स्वामी by श्रवण कुमार साहू"प्रखर"
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