वर्षा-बरखा
चौपाई
वर्षा श्रृतुओं की है रानी ।
जित देखो उत पानी पानी ।।
बरखा रानी मन को भाती ।
विरहन की है अगन जगाती।।
चमक दमक दामिनी डराती ।
नदिया सरिता गीत सुनाती ।।
कृषक झूम कर नाचे गावे ।
आई जिनगानी हर्षावे ।।
काली घटा गगन घहराई ।
रिमझिम रिमझिम बारिश आई।।
जब सेआई बरखा रानी
ओढ़ धरा ने चूनर धानी।।
उमड़ घुमड़ कर बरसे बदरा
विरहन की बह जावे कजरा ।।
केवरा यदु "मीरा "
राजिम
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