Sunday, June 16, 2019

यह सच है (Father's day Special) by रचनाकार✒ श्रवण कुमार साहू"प्रखर'

💞यह सच है 💞
यह सच है कि माँ,
बोलना सिखाती है,
पर कब ,क्या बोलें?
पिता ही सिखाता है।
यह सच है कि माँ ,
चलना सिखाती है।
पर कैसे चलना है,
पिता ही सिखाता है।।

यह सच है कि माँ,
हमें ख्वाब दिखाती है।
पर पिता ही सपनों को,
हकीकत में पूरा करता है।।
यकीनन माँ बच्चों को,
संस्कार सिखाती है।
पर जीने का मकसद,
पिता ही सिखाता है।।

यह सच है माँ रोटी बनाकर,
बच्चों को खिलाती है।
पर उसके लिये आटा,
पिता ही लाता है।।
जिस कपड़े को माँ,
दुलार देकर पहनाती है।
  फटे बनियान पहनकर पिता,
उसके लिए दिन रात कमाता है।।

माँ घर की समृद्ध फुलवारी,
संस्कृति और संस्कार है।
तो पिता उस आशियानें की,
मजबूत नींव आधार है।।
यकीनन माँ से ही बच्चों की ,
पूरी होती हर अरमान है।
लेकिन पिता बच्चों की ,
शान और पहचान है।।

जिस घर में माँ होती है,
वह  घर निखर जाता है।
बिना पिता के घर संसार,
टूटकर  बिखर जाता है।।
माँ है तो बच्चों का दुलार है,
पिता है तभी तो माँ का श्रृंगार है।।
माता पिता के बिना सोचो,
ये कैसा घर -संसार  है।।

यकीनन माँ अपने ,
बच्चों के लिए जीती है।
लेकिन याद रखो परिवार,
पिता से ही जीता है।।
बिन माता पिता के,
यह दुनियाँ बस रीता है।
माँ आँसुओं से भरी रामायण,
तो पिता कर्मों से भरी गीता है।।

रचनाकार✒
श्रवण कुमार साहू"प्रखर'
राजिम, गरियाबंद

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