बेरा भगावत जाथे
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बेरा भगावत जाथे,
मनखे जाथे बुढ़ावत,
कतको हाथ मा बांध ले,
बेरा जाथे भगावत.
बेरा भगावत जाथे.........
जुग ले जुग सतजुग,
द्वापर, त्रेता,कल जुग,
समे संग चक्र मा समा के,
पुरखा के गोठ कहावतथे.
बेरा भगावत जाथे........
का राजा अउ का रंक,
का अमीर अउ का गरीब,
का गोरिया अउ का करिया,
समे संग मा समा जाथे.
बेरा भगावत जाथे......
आज के करनी ल,
आजे म कर डारबे,
काली बर छोड़बे त,
त हो जाही काली.
बेरा भगावत जाथे........
चार दिन जिनगी म,
कतका गुमान करबे,
सुघ्घर तन, धन, दउलत,
धरे रह जाही ठउर म.
बेरा भगावत जाथे........
मनुख तन मिले हे,
सत करम ल कर ले,
कब उड़ि चलही अकास म,
सुवना बिन पांख के,
बेरा भगावत जाथे......
सुख देबे त सुख पाबे,
मया दे त मया ले
इही सुघ्घर संसार ल
पल भर मा सरग जइसे पाबे,
बेरा भगावत जाथे......
कवियतरी
डॉ. जयभारती चन्द्राकर
प्राचार्य
सिविल लाईन गरियाबंद छ. ग.
मोबाइल न. 9424234098
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