दोस्ती में अब धरम-जात गयी,
करते हैं आज कुछ बात नयी।
दिल की बात तुम्हें बतलाते हैं,
त्रिदेवी से सबको मिलवाते हैं।
ये हैं आपस में जिगरी दोस्त,
जैसे चाय बिन अधूरा है टोस्ट।
तीन दोस्तों की ये कहानी है,
तीनों टिक-टाॅक की रानी है।
करते बहुत सभी याद जिन्हें,
पर "राज" का कहाँ याद इन्हें।
गर ढुँढू मैं यह दुनिया सारी,
न मिलेगी ऐसी दोस्त प्यारी।
मिनल है नकलची बंदर सी,
पर दिल की है बड़ी सुंदर सी।
मस्ती में बड़ी सयानी है वो,
लिपस्टिक की दिवानी है वो।
ख्याल सभी का रखती है वो,
दुखी न किसीको देखती है वो।
बड़ी सुंदर है डायना भी यारों,
चांस ना तुम उस पर मारो।
मीनू, मनी का है वहां पहरा,
मिलेगा वरना जखम गहरा।
गुस्से में लगती बड़ी तीखी है,
पर शक्कर-सी वो मीठी है।
मेरी छोटी तो प्यारी बच्ची है,
दोस्ती में थोड़ी सी कच्ची है।
मुझ को बड़ा चिढ़ाती है वो,
"पुष्पा" पे प्यार लुटाती है वो।
बिछड़े भाई-बहन उसका कहना,
मानूँ उसको मैं छोटी बहना।
रब से "राज" एक ही इबादत करे,
यारों की ये यारी सदा सलामत रहे।।
पुष्पराज साहू "राज"
छुरा (गरियाबंद)😊
Awesome��✊��
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