Thursday, June 20, 2019

राम के सुवारी के by केवरा यदु "मीरा "

कऊने जनम के तँयहा बदला  चुकाये रे धोबी चारी करके ।
राम के पियारी के चारी करके ।
जनक दुलारी के चारी करके ।।

गंगा जल कस पबरित
रिहिस जनक दुलारी हा ।
अग्नि परीक्षा देइस
राम जी के    प्यारी हा ।
जीभ तोर जरिस नहीं
कीड़ा घलो परिस नहीं

जीभ तोर जरिस नहीं
कीड़ा घलो परिस नहीं
चारी करके ।
राम  सुवारी के चारी करके
जनक दुलारी के चारी करके ।।

दूत मनके बात सुनके
राम जी उदास होगे ।
माता सीता ला दुबारा
अऊ बनवास  होगे ।
वाल्मीकि के आश्रम में
रोये माथा ला धरके ।।

वाल्मीकि के आश्रम में
रोये माथा ला धरके ।।
चारी करके ।
राम पियारी के चारी करके
जनक दुलारी के चारी करके ।।

कलप कलप के माता सीता
सहत  राहय पीरा ला।
आश्रम  मा जनम देइस
लव कुश  जइसे  हीरा ला ।
सोचथे माता सीता
बेटा ला छाती  मा  धरके ।।

सोचथे माता सीता
बेटा ला छाती मा धरके ।
चारी करके ।
राम के पियारी के चारी करके ।
जनक दुलारी के चारी करके ।

कऊने जनम के तँयहा
बदला चुकाये रे धोबी चारी करके
राम के प्यारी के चारी करके ।
जनक दुलारी के चारी करके ।।
राम के----

केवरा यदु "मीरा "
राजिम

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