कऊने जनम के तँयहा बदला चुकाये रे धोबी चारी करके ।
राम के पियारी के चारी करके ।
जनक दुलारी के चारी करके ।।
गंगा जल कस पबरित
रिहिस जनक दुलारी हा ।
अग्नि परीक्षा देइस
राम जी के प्यारी हा ।
जीभ तोर जरिस नहीं
कीड़ा घलो परिस नहीं
जीभ तोर जरिस नहीं
कीड़ा घलो परिस नहीं
चारी करके ।
राम सुवारी के चारी करके
जनक दुलारी के चारी करके ।।
दूत मनके बात सुनके
राम जी उदास होगे ।
माता सीता ला दुबारा
अऊ बनवास होगे ।
वाल्मीकि के आश्रम में
रोये माथा ला धरके ।।
वाल्मीकि के आश्रम में
रोये माथा ला धरके ।।
चारी करके ।
राम पियारी के चारी करके
जनक दुलारी के चारी करके ।।
कलप कलप के माता सीता
सहत राहय पीरा ला।
आश्रम मा जनम देइस
लव कुश जइसे हीरा ला ।
सोचथे माता सीता
बेटा ला छाती मा धरके ।।
सोचथे माता सीता
बेटा ला छाती मा धरके ।
चारी करके ।
राम के पियारी के चारी करके ।
जनक दुलारी के चारी करके ।
कऊने जनम के तँयहा
बदला चुकाये रे धोबी चारी करके
राम के प्यारी के चारी करके ।
जनक दुलारी के चारी करके ।।
राम के----
केवरा यदु "मीरा "
राजिम
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