Friday, June 14, 2019

वीर के दोहे :- by छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू



हरियर - हरियर पेड़  हा , नइ आवत हे रास।
हीरा - मोती   गे  गँवा ,पथरा  करे  विकास।।
हाथ-गोड़ ला काट के ,रूप ल अपन सजाय।
महल - अटारी तोड़ के , छानी खदर बनाय।।
अँध - विकास  रफ्तार  मा , चाला होगे भेड़।
ऊँच - नीच  सोचे  नहीं , काट  सिराये  पेड़।।
पानी   नइहे   जीव  बर , टूटत   हाबे  साँस।
पेड़  काटके झन करौ , आँखी मूंद बिकास।।
समझौ   माटी के दरद , करौ नहीं तुम पाप।
पेड़ काटके  झन  बनौं , आस्तीन  के साँप।।

छंदकार : विरेन्द्र कुमार साहू
ग्राम  - बोडराबांधा (पाण्डुका)
वि.स. - राजिम जिला -गरियाबंद
छत्तीसगढ़ , मो. 9993690899

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...