Saturday, June 15, 2019

दोहा by केवरा यदु "मीरा "

दो दिन की है जिन्दगी,  मत कर तू अभिमान।
जाना इक दिन है तुझे,  बात सत्य यह मान।।

कौड़ी कौड़ी जोड़ कर, समय न कर बर्बाद।
संग न जाय छदाम जी,  रख ले मन में याद ।।

मेरा मेरा तू करे, कोई होय न यार।
माया में मत बाँध मन, झूठा यह संसार ।।

पानी का तू बुलबुला, जाने कब फुट जाय ।
गिनती की ये साँस है, जाने कब रूक जाय ।।

काम सदा कर  नेक तू, जग में होगा नाम ।।
करना मत उस काम को, जिसमें हो बदनाम ।।

झूठ कपट छल फंद में,  धन जो रहा कमाय ।
वह धन दौलत माल भी,  यहीं पड़ा रह जाय ।।

दिल न दुखाना तुम कभी, खुशियाँ जग में बाँट ।
हँसते हँसते जाय तू, यम का बंधन काट ।।

दीन दुखी के साथ चल,उनको अपना मान।
भूले को रास्ता  दिखा,  प्यासे को पहचान ।।

केवरा यदु "मीरा "
राजिम

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