Friday, June 14, 2019

निर्जला एकादशी by पोखन लाल ठाकुर

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*आज के दिन हे पावन पावन*
*सब के मन हा लागे भावन*

*बने श्रद्धा भाव से सब माई लोगन रखे निर्जला के उपवास हे*
*भगवान के आशीर्वाद बने मिलहि  हाबे वोला आस हे*

*एकादशी के सुघ्घर दिन मा लगथे मेला*
*जगह जगह लगे हावे गुपचुप के ठेला*

*जिनिस जिनिस के खई खजानी*
*देखे में आ जाथे मुँह मा पानी*

*झूला के मजा लेवत हे जम्मो संगवारी मन*
*अउ कही नई मिल पाए इसने अपनापन*

*दीदी माई मन टिकली फुंदरी आनी बानी बिसावत हे*
*बबा हा होटल में  भजिया अउ समोसा खावत हे*

*भारी बिटोवत हे लइका हर अपन ददा अउ दाई ला*
*रसगुल्ला जलेबी अउ खाबो चोकोबार दूध मलाई ला*

*नानकुन टुरी मन के घलो भारी फरमाईस हे*
*पुतरी ,फुग्गा, जूती सेंडल अउ आनी बानी लेवाईस हे*

*अइसन मेला हा सब के मन ला भावत हे*
*आज दिन मेघ राज हर रही रही पानी ला बरसावत  हे*

*निर्जला एकादशी के महिमा हा अपार हे*
*बस जिनगी जिये के सार हे*
*झन भुलाहु संगवारी मेला मड़ई तीज त्यौहार  हे*
*छतीसगढ़ी बोली भाखा इही हमर आधार हे*

*जय जोहार  जय छत्तीसगढ़ जय जय गुरुदेव*🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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