सावन की श्रृतु आई सुहानी
आजा मेरे मीत रे।
लेकर हाथों में हाथ प्रिय
हम गायें मिलन गीत रे।।
स्वाति बूँद को चातक तरसे
जब जब सावन बरसे ।
आजा रे परदेशी सजन
मिलने को जियरा तरसे ।
बरखा की बूँदें हैं छेड़ती
मधुर मिलन संगीत रे ।।
लेकर हाथों में हाथ प्रिय
हम गायें मिलन के गीत रे ।।
दिन में चैन नहि पड़त
नैनों में कटती रतिया ।
बहती अँसुवन धार
याद आती प्यारी बतिया ।
अपलक मुझे निहारना
ये कैसी तेरी प्रीत रे ।।
लेकर हाथों में हाथ प्रिय
हम गायें मिलन के गीत रे ।।
याद करो वो दिन सुहाने
और सुहानी रातें ।
गोद में मेरे सिर रख कर
तुम करते क्या क्या बातें ।
तुम बिन अब न भाये
कोयलिया की पी पी गीत रे।।
लेकर हाथों में हाथ प्रिय
हम गायें मिलन के गीत रे ।।
केवरा यदु "मीरा "
राजिम
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