Thursday, June 27, 2019

तै हांसे तो- by - कवि.कमलेश कौशिक

*अरहज गे मोर मन।*
*तोर मुड़ के सुघ्घर खोपा मा।।*
*पउर साल के देखे रेहेव।*
*आये रेहेस जब रोपा मा।।*
*अउ छंदा गेव तोर लाटा फांदा मा।*
*मया के डोरी में तैय फांसे तो।।*
*मन बइहा मोर बेसुध होगे।*
*गिजिर गिजिर तैय हांसे तो।।*

*जुग जोडी़ तै बना ले मितवा।*
*मया के गठरी,बांधे तो।।*
*जी लेतेव तोर संग मा गोरी।*
*मोर बर पिरित के रंधना रांधे तो।।*
*जी.लेवा अब होगे बिरहा।*
*तोर मन के बोली रासे तो।।*
*मन बइहा मोर बेसुध होगे।*
*गिजिर गिजिर तैय हांसे तो।।*

*तैय मोर मन के सागर बन जा।*
*मैं जन्म के तोर प्यासे तो।।*
*बन जा सुघ्घर हितवा भुंइयां।*
*मैं गरजत घुमरत अगासे तो।।*
*बन चिरैया तैय भंवरत आबे।*
*तोर मन मा मोला संवासे तो।।*
*मन बइहा........।*

*आ जहु तोर घर में।*
*जात समाज से लड़ के।।*
*खुसर जतेव तोर सुन्ना घर मा।*
*मया के गोठ गोठियातेन संग मा।।*
*बने करे बतादे मोला।*
*ददा हाबे देख डरही तोला।*
*जबरदस्ती में तैय खांसे तो।।😂*

*मन बइहा मोर बेसुध होगे।*
*गिजिर गिजिर तै हांसे तो।।*

   *✍रचनाकार✍*
*कवि.कमलेश कौशिक*
  *😂कठलहा 😂*

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...