Thursday, June 27, 2019

निखार by ✒रचना श्रवण कुमार साहू"प्रखर"


          ✒ ✒
शिक्षा के साथ साथ,
जब आए संस्कार।
ज्ञान न बने कभी,
लोगों का व्यापार।।
भविष्य हो सुरक्षित,
मजबूत बनें आधार।
मानवता के हित में,
सब बदले व्यवहार।।
घर और समाज में,
जब आए कोई सुधार।
तभी हम कहेंगे,
सब मे आ गया निखार,
सबका हो गया निखार।।
👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼👏🏼
💐हर दिन स्कूल आबो जी,💐
हर दिन स्कूल आबो जी,
ग्यान के जोत जलाबो जी।
पढ़ लिख के बनबो गुणवान,
हर दिन कहिथे घर के सियान।।
हम अग्यानता  भगाबो जी,
ग्यान के गंगा बोहाबो जी।
सुन जी रामू, सुन जी श्यामू,
सुन सुशीला, सुन अभिरामू।
पुस्तक ग्यान के सागर ये,
जेमा दुनियाँ   समाए हे।
जेन एकर ले दूरिहा रहिथे,
वोकर मती ह भरमाए हे।।
ग्यान के कोनों नई होवे बांटा,
अग्यानता के नई गड़े काँटा।
हमन हरदिन स्कूल जाबोन जी,
अउ जिनगी सुग्घर बनाबो जी।।
✒रचना
श्रवण कुमार साहू"प्रखर"
राजिम, गरियाबंद(छ. ग.)

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