वाणी मधुरस घोलिये, वाणी मीठी होय ।
वाणी से हरषे हृदय, वाणी से ही रोय ।।
परुष वचन मत बोलिए , वाणी है अनमोल ।
सोच समझ कर बोलना , आम नीम को तोल ।।
परुष वचन घर तोड़ता, करता है बिखराव ।
परुष वचन दे जख्म तो , मीठा भरता घाव ।।
ऊँचे पद पैसा अधिक, कड़वी किन्तु जुबान ।
होते अपमानित सदा, घटे मान सम्मान ।।
वाणी ऐसी बोलिये, ज्यों मिसरी का घोल ।
बनती है पहचान भी, सोच समझ मुख खोल ।।
केवरा यदु "मीरा "
राजिम
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