Friday, June 14, 2019

कुकुभ-छंद by केवरा यदु "मीरा "

नारी के  सम्मान करो तुम, नारी  पालन  हारी  जी
नारी होती  घर की  लक्ष्मी, नारी तारण हारी  जी।।

युगों युगों से नारी पूजित, वेद पुराण  बताती है ।
नारी के बिन किस्मत रूठी,जन्म व्यर्थ हो  जाती है।।

नारी  सीता नारी राधा, नारी द्रोपद रानी  थी
विपदा में किच्चक के घर में, भरी अभागिन पानी थी ।।

नारी  बहन बेटियाँ होती, बनती  राखी धागा  जी ।।
बिना बहन के  भाई रोता, मैं क्यों आज अभागा जी ।।

केवरा यदु "मीरा "
राजिम

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