*झिमिर झिमिर बरसे पानी।*
*गीत सुनाये कोयल रानी।।*
*जम्मो सुख्खा भुइयां हा।*
*अषाढ़ में हरियागे।।*
*घर अंगना मोर खेती खार।*
*सरग बरोबर लागे।।*
*लइका मन के घांदी मुंदी।*
*नाचे कउवा छानी छानी।।*
*झिमिर झिमिर बरसे पानी..*
*पागा बांध के मोर किसान।*
*करे किसानी सांझ बिहान।।*
*चमकत बिजली,गुररावत बादर।*
*घटा घनघोर छावत हे।।*
*धरती मैया करे सिंगार।*
*दुल्हन जस वोला सजावत हे।*
*रुख राई अउ डारा पाना।।*
*हरियर होगे आनी बानी।*
*झिमिर झिमिर बरसे पानी।।*
*मोर किसनहा.आस लगाये हे।*
*लहु पछीना,वोमा चुचवाये हे।*
*तोर आये ले सुघघर भुंइया महके।*
*सुख.माटी म बगराये हस।*
*मोर मुरहा पोटर के कोरा मा।।*
*अघाढ़ के बुंद हमागे।*
*धन धन भाग,किसान के।।*
*अमरित रस बरसा दे।*
*मोला बड़ सुहाथे,खेती अउ किसानी।।*
*झिमिर झिमिर बरसे पानी।*
*गीत गाये कोयल रानी।।*
*✍रचनाकार*
*कवि कमलेश कौशिक*
*😂कठलहा😂*
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