Thursday, June 27, 2019

बरखा रानी By कवि कमलेश कौशिक

*झिमिर झिमिर बरसे पानी।*
*गीत सुनाये कोयल रानी।।*
*जम्मो सुख्खा भुइयां हा।*
*अषाढ़ में हरियागे।।*
    *घर अंगना मोर खेती खार।*
     *सरग बरोबर लागे।।*
*लइका मन के घांदी मुंदी।*
*नाचे कउवा छानी छानी।।*
*झिमिर झिमिर बरसे पानी..*

*पागा बांध के मोर किसान।*
*करे किसानी सांझ बिहान।।*
*चमकत बिजली,गुररावत बादर।*
*घटा घनघोर छावत हे।।*
    *धरती मैया करे सिंगार।*
    *दुल्हन जस वोला सजावत हे।*
    *रुख राई अउ डारा पाना।।*
    *हरियर होगे आनी बानी।*
*झिमिर झिमिर बरसे पानी।।*

*मोर किसनहा.आस लगाये हे।*
*लहु पछीना,वोमा चुचवाये हे।*
*तोर आये ले सुघघर भुंइया महके।*
*सुख.माटी म बगराये हस।* 
*मोर मुरहा पोटर के कोरा मा।।*
   *अघाढ़ के बुंद हमागे।*
*धन धन भाग,किसान के।।*
*अमरित रस बरसा दे।*
*मोला बड़ सुहाथे,खेती अउ किसानी।।*

*झिमिर झिमिर बरसे पानी।*
*गीत गाये कोयल रानी।।*

  *✍रचनाकार*
*कवि कमलेश कौशिक*
   *😂कठलहा😂*

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