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धरती में देखो फैली हुई है
नीला नीर भरा रत्नाकर,
वदन आतम के झांकती चंद्रमा
अंबर से मुस्कुराकर ll
चमकती रहती है रातों में
सभी सितारों के साथ,
टूटा तारा जब दिखता है
सब करते हैं फरियाद ll
हृदय को भर देती शीतलता से
ऐसी है यह सुधाकर,
वदन आतम के झांकती है
अंबर से मुस्कुरा कर ll
जब रात अंधेरी होती
सबका मन घबराता है,
देख चंद्रमा की सूरत
सुकून सभी को आता है ll
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रचनाकार :-
बालकवि भास्कर वर्मा "उमंग"
ग्राम चंदना (छत्तीसगढ़)
मो. न. 6268812376
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