परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हमारा पर्यावरण भी समय के साथ काफी परिवर्तित होता जा रहा है। जहां एक ओर मनुष्य सुख की खोज में बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वह पर्यावरण का दोहन भी करता जा रहा है।
पर्यावरण में विभिन्न घटक हैं, जिनकी निरंतर उपस्थिति आवश्यक है। मनुष्य ही नही, वरन समस्त जीवधारी इन घटकों में शामिल हैं। जिससे पूरा पर्यावरण निर्मित होता है। परंतु प्रकृति में पांच मूलभूत तत्व के रूप में भूमि, गगन, वायु, अग्नि और नीर स्थापित है।
भूमि हमारा निवास स्थान है , जल और वायु समस्त जीवों के जीवन का आधारभूत अवयव है। साथ ही अग्नि और आकाश भी हमारे जीवन का और प्रकृति का अभिन्न अंग है। प्रकृति में इन पांच बुनियादी तत्वों से ही अन्य सभी तत्वों का संरक्षण संभव है। अतः पर्यावरण में इन मूलभूत तत्वों का संरक्षण आवस्यक है, जिससे अन्य सभी जीवधारी परस्पर सम्बद्ध है।
इनका संरक्षण इसलिए भी अत्यंत आवश्यक है, क्योकि यही वह मूलभूत घटक है जिससे पूरी प्रकृति संचालित है।
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*अमित कुमार*
*रचनाकार (हिंदी, छत्तीसगढ़ी)*
*गाड़ाघाट-पाण्डुका गरियाबंद*
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