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गौ हत्या अब हो रही, मुश्किल में है जान l
दया की नहीं भावना, कैसा है इंसान ll
अपनी मां को मारता, धरकर यह तलवार l
भूल गया है कर्ज को, ये सारा संसार ll
मेरा मन रोता यहां, देख मनुज के काम l
नहीं चुकाते कर्ज को, हो जाते बदनाम ll
रचनाकार:-
बालकवि भास्कर वर्मा "उमंग"
ग्राम- चंदना (छत्तीसगढ़)
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