कविता
वीर शहीद सुपुत्र हूँ
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वीर शहीद सुपुत्र हूँ,
शत्रु का मैं मृत्यु हूँ,
प्रतिशोध ज्वाला सा धधक रहा हूँ,
मधुर मुस्कान तिरंगा की रक्षा कर रहा हूँ ,
सतत् देश प्रहरी झंड़ा ऊँचा कर रहा हूँ,
मेरा देश महान् मैं वीर महान् हूँ,
वीर शहीदों की निशानियाँ संजो रहा हूँ.
जूनुन ज़ज्बां देशभक्ति अर्पण कर रहा हूँ.
रचनाकार
डॉ. जयभारती चन्द्राकर
सिविल लाईन गरियाबंद ,
जिला -गरियाबंद,छत्तीसगढ़.
मोबाईल न. 9424234098
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