तुम्हारी दया की कान्हा एक नजर माँगती हूँ
मन मोहन तेरे चरण में बसर माँगती हूँ ।।
साँसों में तुम बसे हो एक पल न भूल पाऊँ ।
भक्ति की ले इकतारा कान्हा तुझे रिझाऊँ ।
दिल में रहे जो हरपल वह कुँवर माँगती हूँ ।।
तुम्हारी दया की कान्हा एक नजर माँगती हूँ ।
तेरे रंग में रंगूँ मैं कोई रंग न लुभाये
माया में मन न भटके सत्यपथ से न ड़िगाये।
मेरे कान्हा तुमसे विनती वह ड़गर माँगती हूँ।।
तुम्हारी दया की कान्हा एक नजर माँगती हूँ ।।
दुखियों का बन सहारा मैं गीततेरे गाऊँ ।
आये गमों की आँधी तेरे दम से मुस्कुराऊँ
सुख में न कभी फूलूँ वह कसर माँगती हूँ ।।
तुम्हारी दया की कान्हा एक नजर माँगती हूँ।।
दिल की यही है तमन्ना गाती रहूँ भजन।
चरणों में तेरी "मीरा की लगती रहे लगन।
ले जा मुझे तू कान्हा जिधर माँगती हूँ ।
तुम्हारी दया की कान्हा एक नजर माँगती हूँ ।।
केवरा यदु "मीरा "
राजिम
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