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देवी-देवता म करथे गा पुजई।
मनखे काबर होगे गा निरदई।
कोनो देवथे कुकरा,
कोनो देवथे बोकरा।
बदना ल बदे रहिथे,
मोला लागथे कल्लई।
देवी-देवता......
सेत म येला मनातेन,
नरियर भेला चढ़ातेन।
देवता नई माने कहिथे,
यहु हे अड़बड़ दुखदई।
देवी-देवता......
अपन मुड़ ल नई काटय,
दुसर जीव लाके काटय।
पुरखा के चलथे कहिके,
कोनो जिनिस ल टपकई।
देवी-देवता......
रचनाकार- *गुणेन्द्र सिंह पोर्ते "अविराम" फिन्गेश्वर गरियाबंद छत्तीसगढ़*
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