Sunday, June 9, 2019

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा by केवरा यदु "मीरा"

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तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा  हो कान्हा।
आओ कन्हाई आओ कन्हाई।।
तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा--

कान्हा तूने राधा से प्रीत लगाई।
प्रीत लगा के कैसे भूले कन्हाई।
गोकुल की गलियों में फिरती बावरी सी।
तन की सुध बिसराई  कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा।।

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा।।
आओ कन्हाई-----

यमुना तट पर  आ जाओ कान्हा।
मधुर मुरलिया सुना जाओ कान्हा
आके गले से लगा जाओ  कान्हा।
क्यूँ कर प्रीत   भुलाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा।।

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा।
आओ कन्हाई---

आकर कान्हा फिर रास रचा दो।
सावन के झूले में आकर झुला दो।
प्यासी है अँखियां श्याम दरश दिखादो।
इक तू ही मेरा सहाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा।।

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा।
आओ कन्हाई------

तेरे मिलन की मैने आस लगाई।
मैं तेरी मीरा  तू है मेरा  कन्हाई।
जनम जनम से प्रीत   सगाई।
निकला  क्यूँ   हरजाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा।।

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा।।
आओ कन्हाई आओ कन्हाई।
तुझ संग  प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा।।

केवरा यदु "मीरा"

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