Thursday, June 27, 2019

मन by केवरा यदु "मीरा"


विधा- दोहा

             

मन मोहन मन में बसा, मन वृन्दावन धाम ।
होंठो पे हरपल रहे,  राधा मोहन नाम ।।

श्याम नाम निशदिन जपूँ, मूरत नैन समाय ।
हुई बावरी श्याम की , कुछ भी नहीं सुहाय ।।

मन कहता यह तन बनें ,वृन्दावन की धूल ।
श्याम चरण से लिपटकर , जाय खुशी से फूल ।।

कहे मगन मन बावरा,  नाचूँ ब्रज बन मोर ।
पंख सजे उनके मुकुट , जो है नंद किशोर ।।

मन मेरा यह भी कहे, बनूँ कदम की डाल।
झूला झूले राधिका, संग गोप गोपाल ।।

केवरा यदु "मीरा "
राजिम (छ ॰ग)

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