इसी बीच मेरे भी दिल की चीख...
रेप कांड की अग्नि में तपती मेरी कविता...👇👇
सुना था देश बदल रहा है, आज हम सबको भी दिख गया।
नन्ही सी एक परी की इज्जत, गद्दारों के हाथों में बिक गया।।
खेल-कूद और शिक्षा लेकर, देश का करी रहती वो नाम।
पर इन भूखे हैवानों ने कैसे, कर डाला बच्ची का जीना हराम?
वह तो बच्ची मासूम थी, हिन्दू-मुस्लिम में ना जाने कोई फर्क।
लेकिन कलयुग के दरिंदो ने, जीवन को उसके बना दिया क्यों नर्क?
सुना है मैंने उन दरिंदो में से, हमारे कुछ "कानून" के रखवाले है।
कैसे आखिर वो "रक्षक" आज, नरभक्षक बनकर आये है?
रेप जैसे दरिंदगी के चलते हमारा, देश चैन से कैसे सोएगा?
नरभक्षी के हाथ होगा कमान, तो देश खून के आँसू रोयेगा।
इन देशद्रोहियों के चलते, भरोसा कानून से अब उठ गया।
नन्ही परी की बर्बरता से, देश की ही "इज्जत" लुट गया।
मासूम से कुकर्म करके कैसे, तुम्हारा दिल नही रोया होगा?
छोटी-सी जान की हत्या कर, ना जाने कैसे तू सोया होगा?
देश के ऐसे जल्लादों से "राज", देश के जनता पर उपकार करो।
देशद्रोहियों को चढ़ा फाँसी पर, खुलेआम गद्दारों का संहार करो।।
कलयुग के इन दानवों का जब, अस्तित्व दूनिया से मिट जायेगा।
निर्भया, आसिफा जैसी बेटियों को तभी, "सच्चा इंसाफ" मिल पायेगा।।
पुष्पराज साहू
जय हिन्द
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