Sunday, June 9, 2019

गजल by केवरा यदु "मीरा "

मीत हमको कभी तुम सताना नहीं
दूर जा कर हमें तुम रुलाना नहीं।।

जी न पायें सजन हम बिना आपके।
जान कर तुम हमें आजमाना नहीं।।

जी रही हूँ तुझे देख कर साजना।
तुम नहीं तो कहीं भी ठिकाना नहीं।।

तुम मुझे यूँ सदा ही हँसाया  करो ।
हाँ कभी  तुम में'रा दिल दुखाना नहीं।।

जानते हो तुम्हीं चूड़ियों की खनक ,
माथ बिंदी कभी तुम मिटाना नहीं।

केवरा यदु "मीरा "
राजिम

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