Saturday, June 15, 2019

मानव जीवन पर व्यंग्य by विरेन्द्र सिंह ठाकुर


   🎈🎈🎈🙏🎈🎈🎈
न जाने कब तेरे फ़ोटो पे,
     फूलों कि माला सज जाय
न जाने कब तुझको हैं,
  मौत सुंदरी आके गले लगाय
कुछ करले धरम कमाई,
        कुछ करले पूण्य भलाई
कुछ नहीं जाता,साथ जगत से,
          मत कर हाय - हाय
*न जाने कब............*
🌷🌷🌷(1)🌷🌷🌷
अगर करेगा नेक करम तो,
           नेकी का फल पायेगा
बोयेगा गर पेड़ बबूल तो,
            आम कहाँ से पायेगा
*बैर जगत में करता सबसे* ,
            *कहाँ मिलेगा चाय*
न जाने कब.............
(यहाँ चाय मतलब सम्मान है)
🍀🍀🍀(2)🍀🍀🍀
मानव का तुझे जन्म मिला है,
                बन जा तू इंसान रे
आने वाले कल का प्यारे,
                होगा तू भगवान् रे
*हँसी-खुशी जग से जायेगा-2*
             *करके बाय-बाय*
न जाने कब ............
🌾🌾🎈🙏🎈🌾🌾
        📝रचनाकार📝
     *विरेन्द्र सिंह ठाकुर*
कवि,व्याख़्याकार एवं उद्घोसक
   ग्राम-कपसीडीह(राजिम)
   मो.नं.-8718916468

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