🎈🎈🎈🙏🎈🎈🎈
न जाने कब तेरे फ़ोटो पे,
फूलों कि माला सज जाय
न जाने कब तुझको हैं,
मौत सुंदरी आके गले लगाय
कुछ करले धरम कमाई,
कुछ करले पूण्य भलाई
कुछ नहीं जाता,साथ जगत से,
मत कर हाय - हाय
*न जाने कब............*
🌷🌷🌷(1)🌷🌷🌷
अगर करेगा नेक करम तो,
नेकी का फल पायेगा
बोयेगा गर पेड़ बबूल तो,
आम कहाँ से पायेगा
*बैर जगत में करता सबसे* ,
*कहाँ मिलेगा चाय*
न जाने कब.............
(यहाँ चाय मतलब सम्मान है)
🍀🍀🍀(2)🍀🍀🍀
मानव का तुझे जन्म मिला है,
बन जा तू इंसान रे
आने वाले कल का प्यारे,
होगा तू भगवान् रे
*हँसी-खुशी जग से जायेगा-2*
*करके बाय-बाय*
न जाने कब ............
🌾🌾🎈🙏🎈🌾🌾
📝रचनाकार📝
*विरेन्द्र सिंह ठाकुर*
कवि,व्याख़्याकार एवं उद्घोसक
ग्राम-कपसीडीह(राजिम)
मो.नं.-8718916468
Saturday, June 15, 2019
मानव जीवन पर व्यंग्य by विरेन्द्र सिंह ठाकुर
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत
कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528 दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो काति...
No comments:
Post a Comment