Saturday, June 15, 2019

मेरे प्यारे पापा by पुष्पराज साहू "राज"

सुख-दुख में होते साथ हमारे, दुख में धीरज बाँधते हैं वो।
ना समझे दुनिया वाले मगर, अच्छे से हमें जानते हैं वो।।
परिवार खुश रखने हमेशा, ख्वाहिश पूरी करते हैं वो।
बीवी-बच्चों पर करते खर्चे, पर खुद नहीं संवरते हैं वो।।

जिंदगी के कश्मकश में अक्सर, खोये से रहते हैं वो।
करने परिवार की उदरपूर्ति, समय के साथ बहते हैं वो।।
दो पैसों के खातिर दफ्तर में, मालिक को भी सहते हैं वो।
दिनभर परेशानी सहकर भी, आई लव यू बच्चों कहते हैं वो।।

"राज" की परवरिश खातिर, खुद का जीवन तपाता है वो।
उन्हें भी होती है तकलीफ़े, पर भी हमसे छिपाता है वो।।
मुश्किलों से लड़कर कैसे, ना खोते अपना आपा हैं वो।
दुनिया में है सबसे लाजवाब, मेरे प्यारे पापा हैं वो।।

पुष्पराज साहू "राज"
छुरा (गरियाबंद)

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