Sunday, June 9, 2019

सबके अंदर है भरी कला by अनिता सुभाष देशमुख

*ज्ञान मिल गया है सबको,*
*सबके अंदर  है भरी कला,*
*रात में रहता है अंधकार ,*
*दिन में दिखता है उजला।*
*कभी सोचा हमने कभी,*
*आखिर  ऐसा क्यों होता है,*
*दिन में जगता इंसान ,*
*रात में क्यों सोता है।*
*सब ईश्वर की देन है यह,*
*दुनिया का वो रचयिता है,*
*रब ही कर्ता हैं, और*
*रब ही करविता है।*
*अच्छे लोगो की न बनती कभी,*
*वो साथ न रहते हैं,*
*नशे में  जो डूबा हो इंसान,*
*वो ही एक प्रवाह में बहते हैं।*
*न होता है इंसान* 
*खूबसूरत सूरत से,*
*व्याक्तित्व निखरता है इंसान का*
*सिर्फ उनकी सीरत से।*
*नित उठ प्रभात ,*
*माँ पिता का करें चरण स्पर्श,*
*वो ही देने वाले है अच्छे परामर्श,*
*दूसरों को सीख देने से पहले,*
*खुद उनका आत्मसात करें*
*तब अपने को  वो सीख,*
*अमल करने की बात करें।*
*एक हरि भजन की बोलो,*
*न कोई गा पाएगा,*
*मोहब्बत की शायरी पूछो,तो*
*हर जुबां से वो निकल जायेगा। *आओ सब मिलकर हम करें प्रण,*
*सद आचरण अपनाएंगे,*
*जहाँ जाए हम औरो के दिलों में,*
*अपनी एक सुंदर छाप छोड़ जाएंगे।*

जय श्री राम

...✍अनिता सुभाष देशमुख©
   8/06/2019

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