छत्तीसगढ़ के लोककला ह,
देखत देखत नन्दावत हे,
इंहा के लइका सियान मन हा,
पंजाबी अउ भोजपुरी गाना ल रथे गावत हे।
लोककला के ए दसा ले देख
हमर महतारी के अंतस दुखत हे,
पुरखा मन के दे चिन्हारी ह,
कुआँ नरवा कस सुखत हे।
दाई क़े ए पीरा ल देख,
ओकर दुलरू लइका मन
लोककला ल बचाय बर,
मिलजुर करिस चिंतन मनन।
जम्मों मिलक़े एक ठउर म,
सात दिबस के रखबो कार्यशाला,
जेमा आही संगीत ले जुड़े
जम्मो सियान,जवान अउ बाला
अइसन सुघ्घर बिचार के,
सब्बो झन हिरदे ले करिस अगुआई,
परिवार जइसे राहत हवे आके
जम्मों संगी, गुरु, बहिनी अउ भाई।
एखर मन के सेवाभाव के
कइसे करो मेहा बखान,
छोटे छोटे गांव के कलाकार मन ल,
देवथ हावे ओखर पहचान।
...✍अनिता सुभाष देशमुख©
07/06/2019
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