नारी तू नारायणी हर युग में पूजी जाती।
माँ बेटी बहन बन कर हर घर को स्वर्ग बनाती।।
बेटी बन स्नेह लुटाती मात पिता के आँगन।
दीप सजाती रंगोली बन महकाती है उपवन।
लाड़ली बिटिया एक दिन पिया के संग जाती।।
माँ बेटी बहन बन कर---
बहना बन भाईयों के संग संग खेला करती।
पढ़ना लिखना हँसना गाना गृह कार्य भी करती।
रक्षा बंधन सावन का तब वह राखी बन जाती।।
माँ बेटी बहन बन कर--
आई जब पिया की गली बनी पिया की प्यारी।
रंगी पिया के रंग बिटिया अर्धांगनी कहाई।
सेवा और सहकार से वह घर को स्वर्ग बनाती।।
माँ बेटी बहन बन कर----
माँ बनने की खुसी में वह फूली नहीं समाती।
गूँज रही किलकारी घर में पालने झुलाती।
दोनों कुल की आन है बिटिया कुलवंती कहलाती।।
माँ बेटी बहन बन कर---
नारी तू न होती जग में ध्रुव प्रहलाद ने होते।
नर ही नर होते जग में तेरे बिन सब रोते।
तू सृजन की देवी है जननी तू कहलाती।
माँ बेटी बहन बन कर हर घर को स्वर्ग बनाती।
नारी तू नारायणी हर युग में पूजी जाती।
माँ बेटी बहन बन कर-
केवरा यदु"मीरा"
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