Thursday, June 27, 2019

जीवन अनमोल- by कृष्ण कुमार कश्यप (Jiwan Anmol By poet krishna K. Kashyap)

जीवन  है  अनमोल , कुछ  तो  कर यारा।
फिर  ना  मिलेगी   जिंदगी  तुझे  दोबारा।
पकड़  फिसल  ना  जाए , वक्त  हाथों  से,
चलता  बहुत  तेज  है ,  समय  की  धारा।
सुराग़ क्या , फट जायेगा आसमानी सीना,
मन लगाकर पत्थर को तु उछाल तो ज़रा।
हौसला बुलंद कर, लकीरों का क्या भरोसा,
हाथ बढ़ा ज़रा , दूर  नहीं आसमां का तारा।
हिम्मत  ना  हार , दुःख  पानी का  बुलबुला,
हर  रात  के  बाद  तो  होता  ही  है  सवेरा।
डर  मत  मझधार  से  हाथ  पांव  तो चला,
राह  तेरा  ताक  रहा , मंजिल  का किनारा।
गर  जज्बा  लड़ने  की, अंधेरा से डर कैसा,
सूरज बन निकल सही, छट जाएगा अंधेरा।

            ✍️कृष्ण कुमार कश्यप
                 शिक्षक
                 शा.उ.मा.वि.उरमाल
                 गरियाबंद (छत्तीसगढ़)

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