जीवन है अनमोल , कुछ तो कर यारा।
फिर ना मिलेगी जिंदगी तुझे दोबारा।
पकड़ फिसल ना जाए , वक्त हाथों से,
चलता बहुत तेज है , समय की धारा।
सुराग़ क्या , फट जायेगा आसमानी सीना,
मन लगाकर पत्थर को तु उछाल तो ज़रा।
हौसला बुलंद कर, लकीरों का क्या भरोसा,
हाथ बढ़ा ज़रा , दूर नहीं आसमां का तारा।
हिम्मत ना हार , दुःख पानी का बुलबुला,
हर रात के बाद तो होता ही है सवेरा।
डर मत मझधार से हाथ पांव तो चला,
राह तेरा ताक रहा , मंजिल का किनारा।
गर जज्बा लड़ने की, अंधेरा से डर कैसा,
सूरज बन निकल सही, छट जाएगा अंधेरा।
✍️कृष्ण कुमार कश्यप
शिक्षक
शा.उ.मा.वि.उरमाल
गरियाबंद (छत्तीसगढ़)
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