Friday, May 31, 2019

किसान -by विरेन्द्र सिंह ठाकुर

🎈👳 ** 👳🎈

सब झन के गा पेट भरइया,
   मयँ हा गरीब किसान हरंव|
भारत माँ के शान हरंव अउ,
   देश के मयं पहिचान हरंव|
अन्नदाता अंव धरती के मयं,
      संगी अउ मितान हरंव|
सब झन......................
🎈🎈🌹🙏🌹🎈🎈
                *(1)*
घाम करय चाहे बादर बरसे,
       मोला खेती कमाना हे|
खून पसीना अपन बोहाके,
   भुंइया ले अन उपजाना हे|
सोन चिरईया भुइंया के मयं,
        *मयारू संतान हरंव*|
सब झन............,
🌹🌹🎈🎈🎈🌹🌹
                  *(2)*
नेता मन बर वोट अंव मंय,
   खाये अड़बड़ चोट हंव मंय|
ऐखर मन के रोग हरे बर,
फरपिपरा अउ सोंठ अंव मंय|
*राजनीत* के मुद्दा अंव मंय,
    *वोट बैंक के खान हरंव|*
🎈🎈💟🎈🎈
सब झन के गा पेट भरईया
   मंय हा गरीब किसान हरंव|
🙏🌹🌹🎈🌹🌹🙏
💟💓💓🌹💓💓💟
       📝 *रचनाकार* 📝
       *विरेन्द्र सिंह ठाकुर*
   *कवि एवं मंच संचालक*
      ग्राम-कपसीडीह(राजिम)
       मो.नं.-8718916468

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...