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सब झन के गा पेट भरइया,
मयँ हा गरीब किसान हरंव|
भारत माँ के शान हरंव अउ,
देश के मयं पहिचान हरंव|
अन्नदाता अंव धरती के मयं,
संगी अउ मितान हरंव|
सब झन......................
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*(1)*
घाम करय चाहे बादर बरसे,
मोला खेती कमाना हे|
खून पसीना अपन बोहाके,
भुंइया ले अन उपजाना हे|
सोन चिरईया भुइंया के मयं,
*मयारू संतान हरंव*|
सब झन............,
🌹🌹🎈🎈🎈🌹🌹
*(2)*
नेता मन बर वोट अंव मंय,
खाये अड़बड़ चोट हंव मंय|
ऐखर मन के रोग हरे बर,
फरपिपरा अउ सोंठ अंव मंय|
*राजनीत* के मुद्दा अंव मंय,
*वोट बैंक के खान हरंव|*
🎈🎈💟🎈🎈
सब झन के गा पेट भरईया
मंय हा गरीब किसान हरंव|
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📝 *रचनाकार* 📝
*विरेन्द्र सिंह ठाकुर*
*कवि एवं मंच संचालक*
ग्राम-कपसीडीह(राजिम)
मो.नं.-8718916468
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