🌞🌞🌞🌝🌞🌞🌞
ऐसो के गरमी ह,
नंगत के सतावत हे|
बइठे बइठे मनखे के
पसीना चुचवावत हे-2
🌞🌞🌞(1)🌞🌞🌞
जेला देखबे तेखर मूहूं
सुसवाहा असन दिखत हे
कोकाकोला थमसप ल
घेरी-बेरी पियत हे
**करसी के पानी अउ*
*सरबत नंदावत हे**..
*ऐसो के गरमी......*
🌞🌞🌞(2)🌞🌞🌞
ए.सी.कूलर दिनभर
चलत हे घर म
घरखुसरा होगे मनखे
गर्मी के डर म |
*बिजली के बिल घलो*
*आंय बांय आवत हे*..
*ऐसो के गरमी....*
🌞🌞🌞(3)🌞🌞🌞
जंगल के जिनावर घलो
पानी बर तरसत हे
बादर ले पानी नहीं
आगी ह बरसत हे
*गरमी के किस्सा ल*
*विरेन्द्र ह सुनावत हे*
*अरे ऐसो के गरमी ....*
🌞🌞🌞☔🌞🌞🌞
🌞📝रचनाकार📝🌞
*विरेन्द्र सिंह ठाकुर*
कवि एवं मंच संचालक
ग्राम- कपसीडीह(राजिम)
मो.नं.-8718916468
Friday, May 31, 2019
ऐसो के गरमी- by विरेन्द्र सिंह ठाकुर
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