Friday, May 31, 2019

मेरे मां पापा by कवयित्री अनिता सुभाष देशमुख

माँ ने जैसे मुझे 9 माह कोख में रखा,
पापा ने मेरे मेरी माँ का और भी ध्यान रखा।

मेरी माँ करवट लेकर सोई जब उस पहर,
पापा मेरे भविष्य की कई योजनाएं संजोते थे रात भर।

मुझे जन्म देते वक्त मां की आंखों  में आंसू आये थे,
पापा की आंखे भी मुझे देख खुशी की बूंदे छलकाए थे।

माँ की आंखों की तारा बन आई,
पापा की लाडो बेटी भी कहलाई।

माँ की आँचल में सो जाती थी,
लोरी जब मेरी माँ मुझे गाके सुनाती थी।

कुछ माह ही बीता मेरे सेहत का बुरा दौर आया,
मुझे ठीक करने मेरे पापा ने न जाने कहां कहां दौड़ लगाया।

एक पल को अपने आंखों से दूर न करते मेरे पापा ,
सारा काम छोड़ मेरी सलामती के लिए दुआ करते मेरे पापा।

मां की मेरी रात की नींद भी उनकी आंखों में रही नहीं,
रात भर जागकर देखती बिटियां उनकी न जाग जाए कहीं।

मां पापा के इस त्याग  से बिटिया एक दिन स्वस्थ हुई,
तब जाकर उनकी ममता दिल से आश्वस्त हुई।

उठना बैठना बोलना चलना सब कुछ देर ही सिखी,
पर माँ पापा को कभी मुझमे ये मेरी कमी नही दिखी।

माँ मुझे छोड़ उस वक़्त भी खेत में काम को जाती थी,
उस वक़्त भी मेरी ही चिंता उन्हें सताती थी।

खुद  दिन भर कुछ न खाती,
मुझे दूध पिलाने कड़ी दोपहर में भी दौड़ कर आ जाती।

बचपन से लेकर अब तक पापा की लाडली ही रही,
हर दुख सह पापा ने हर ख्वाईश मेरी पूरी करी।

स्कूल में दाखिला के वक़्त हो,या स्कूल की सारी जरूरतों का खर्चा,
चाहे कपड़े खिलौने हो,या लम्बी दवाई का पर्चा।
अपनी बेबसी का आलम कभी हमे  न दिखलाये,
सारे दर्द सह गए अकेले ,पर अपनी इस बिटिया के सामने में हमेशा मुस्कुराए।

जब लेना था फैसला अपनी बिटिया के शादी का,
अपने सारे मान को ठेस पहुँचा ,बेटी की ख़ुशी का सम्मान किया।
इस बेटी के लिए चुप रहे,जब कुछ लोगो ने इनका अपमान किया।

शेर के जैसे दहाड़ते  पापा जब कोई गलत होते देखा,
हर उम्र ईमानदारी से जिये ,न किये कभी गड़बड़ी का लेखा जोखा।

हर किसी का व्योहार कैसा है ये देखते हुए भी मेरे पापा आज चुप है,
सिर्फ इसलिए कि उनकी बिटियां अपने जीवन साथी के साथ खुश है।

अगर कोई अपमान की घड़ियां इस बेटी पर फूटेगी ,
तब उस वक़्त मेरे पापा की चुप्पी हमेशा के लिए टूटेगी।

जब बेटी ने अपनी मर्जी  का जीवन साथी चुना ,
तब भी कहा इस बेटी के फैसले पर नाज है,
मेरे पापा मेरे आदर्श कल भी थे और आज हैं।

कहते  मेरे पापा मेरी बेटी मेरा अभिमान है,
पापा के इस निश्छल प्रेम को हर पल इनके कृतज्ञ रहूंगी,
मेरे पापा मेरी शान है मेरे पापा मेरी शान है.....

        ......✍️अनिता सुभाष देशमुख
23/09/2018

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