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बारूदों के ढेर पर
मै खड़ा रहता हूँ,
कितना भी जख्म हो
मै दर्द सहता हूँ ll
कभी मर जाता हूँ मै बमो से
तो कभी घायल हो जाता हूँ,
बड़े बड़े चट्टानो मे
मै ढँक जाता हूँ ll
देश के लोगों के लिए
जान कुर्बान कर जाता हूँ ll
पर आए कितना भी तूफान
हार नहीं मानूंगा, सीना मै तानूँगा,
अगर रखा पैर सीमा के अंदर
तो तेरी खैर नहीं, तुझे जिंदा धरती मे गाड़ूंगा ll
हट जा रास्ते से वरना
यहीं तुझे पछाडूंगा ll
रचनाकार :-
भास्कर वर्मा "उमंग "
(छत्तीसगढ़)
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